हलाला क्या है ? मीडिया क्या बता रहा है ? और हम क्या समझ रहे हैं ? What is Halala? What media Showing? and What We Understand?
#हलाला क्या है ? मीडिया क्या बता रहा है ? और हम क्या समझ रहे हैं ?
मैंने बहूत सारे मुस्लिम भाईयों के लेख हलाला के बारे में देखे , पढ़े , उनमें से अकसर में हलाला को उसी तरह समझाया गया है जो इस्लाम और मुस्लिम विरोधी मीडिया,सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है, जिसमें झूठ, फरेब और प्रोपेगैंडा के सिवा कुछ नहीं है।
एक बात समझ लीजिए कि टीवी चैनलों के जरिए दिखाए और बताए जा रहे हलाला की न तो इस्लाम में कोई हकीकत है और न किसी भी हालत में इजाजत है,बल्कि यह तो सरासर लानती अमल है।
हलाला किसे कहते हैं ?
" #तलाक " अल्लाह तआला के नज़दीक जायज और हलाल चीजों में सबसे नापसंद चीज़ है.(अबु दाऊद)
हदीस में आता है हुजूर ﷺ ने फरमाया :
" शादियां करो और तलाक मत दो, तलाक देने से अल्लाह का अर्श हिल जाता है"
(इब्ने अदी जम्उल फवाईद)
लेकिन चूँकि इंसान की शादीशुदा जिंदगी में न चाहते हुए भी कभी ऐसे हालात बन जाते हैं कि मेल मिलाप और सुलझाने समझाने की कोशिश के बावजूद शोहर बीवी का एक साथ रहना मुश्किल हो जाता है और अब यकीन हो जाए कि किसी तरह निबाह मुम्किन नहीं तो इस्लाम ने इजाजत दी है कि तलाक के जरिए वह दोनों अलग हो सकते हैं।
उसके लिए बेहतर तरीका यह है कि मर्द बीवी को एक तलाक दे जब औरत पाकी की हालत में हो (उसके पीरियड के दिनों में तलाक न दे)
और इद्दत की मुद्दत तीन माहवारी इंतजार करे, हो सकता है इस बीच मियां बीवी फिर से अपने मामले को सुलझा लेवे,और रुजू से पति पत्नी बन जावे।
अगर फिर भी कोई रास्ता न निकले और शौहर इद्दत की मुद्दत में रजुअ न करे तो तीन पीरियड के बाद वह अलग हो जाएंगे।
फिर कभी दोनों राज़ी हो जाए तो दोबारा नया निकाह और महर अदा करके दोनों साथ रह सकते हैं
इस तरह दो बार तक कर सकते हैं.(यानी पहले एक तलाक दी,फिर तीन महीने बाद जुड़ा हो कर फिर शादी की, फिर कुछ ऐसा बड़ा मामला पेश आया तो फिर साफ शब्दों में एक तलाक दी तो इस तरह दो बार तक की गुंजाइश है)और तीसरी बार तलाक दे दी तो उसके बाद कोई गुंजाइश नहीं रह जाती।
ऊपर बताए तरीके (तलाक़े रजई के बाद बाइन और जुदा होने) में औरत का फायदा है उसे हर बार नया महर मिलेगा।
और इस तलाक के तरीके को इस्लाम और शरीअत ने अहसन (सबसे अच्छा ) तरीका बताया और इसकी तारीफ की है।
लेकिन अगर तीन तलाक हो गई, चाहे किसी ने जहालत में एक साथ ही तीन तलाक दे दी,या अलग अलग तीन बार दी,हर सूरत जिसमे तीन तलाक हुई,अब वह दोबारा अपनी बीवी से निकाह नहीं कर सकता।
अब इन दोनों का विवाहित जीवन समाप्त हो गया, अब उनको अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए और इस शौहर/बीबी के अलावा दुनिया के जिस मर्द/औरत से चाहे निकाह करे।
#हलाला
अगर तीन तलाक हो जाने के बाद इद्दत (तीन माहवारी) गुजर जाने के बाद औरत ने किसी दूसरे मर्द से शादी कर ली, और दोनों में मियां बीवी वाला रिश्ता और ताल्लुक भी कायम हो गया, और दोनों मियां बीवी की तरह शादी शुदा जिंदगी गुजारने लगे, और अल्लाह का करना ऐसा हुआ कि उसके इस मौजूदा शौहर का इंतेकाल हो गया या किसी वजह से इस शौहर ने भी तलाक दे कर अलग कर दी तो अब अगर यह औरत चाहे तो इद्दत गुजरने के बाद पहले (साबिक) शौहर से शादी कर सकती है इसी को #हलाला कहते हैं,यानी बीवी पहले वाले हसबैंड के लिए हलाल हो गई।
नोट: ध्यान रहे कि यह निकाह प्री- प्लान किया हुआ न हो, न पहले से तय किया हुआ हो , वरना अगर कोई तय करके, शर्त रखकर हलाला के लिए शादी करे तो ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के रसूल ﷺ ने लानत फरमाई है,और लानत बहुत खतरनाक चीज़ है।
हुजूर ﷺ ने गुस्सा और नाराज होकर फरमाया कि अल्लाह की लानत हो हलाला करने वाले पर (जो शादी, तलाक देने के लिए या औरत के पहले शौहर के लिए हलाल करने के लिए निकाह करे )
और उस पर भी जिसके लिए हलाला किया जाए (वह मर्द जो तलाक की शर्त रखकर या हलाला की नियत से अपनी बीवी की शादी किसी दूसरे मर्द से कराए।
(मुसनदे अहमद:2/323, बैहकी, नसाई, तिर्मिज़ी, अबु दाऊद, दारमी)
उम्मीद है इस तहरीर से हमारे मुस्लिम भाईयों के साथ साथ गैर मुस्लिम भाईयों को भी तलाक और हलाला समझ आएगा,और बहुत सारी गलत फहमियां दूर होगी।
मैंने बहूत सारे मुस्लिम भाईयों के लेख हलाला के बारे में देखे , पढ़े , उनमें से अकसर में हलाला को उसी तरह समझाया गया है जो इस्लाम और मुस्लिम विरोधी मीडिया,सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है, जिसमें झूठ, फरेब और प्रोपेगैंडा के सिवा कुछ नहीं है।
एक बात समझ लीजिए कि टीवी चैनलों के जरिए दिखाए और बताए जा रहे हलाला की न तो इस्लाम में कोई हकीकत है और न किसी भी हालत में इजाजत है,बल्कि यह तो सरासर लानती अमल है।
हलाला किसे कहते हैं ?
" #तलाक " अल्लाह तआला के नज़दीक जायज और हलाल चीजों में सबसे नापसंद चीज़ है.(अबु दाऊद)
हदीस में आता है हुजूर ﷺ ने फरमाया :
" शादियां करो और तलाक मत दो, तलाक देने से अल्लाह का अर्श हिल जाता है"
(इब्ने अदी जम्उल फवाईद)
लेकिन चूँकि इंसान की शादीशुदा जिंदगी में न चाहते हुए भी कभी ऐसे हालात बन जाते हैं कि मेल मिलाप और सुलझाने समझाने की कोशिश के बावजूद शोहर बीवी का एक साथ रहना मुश्किल हो जाता है और अब यकीन हो जाए कि किसी तरह निबाह मुम्किन नहीं तो इस्लाम ने इजाजत दी है कि तलाक के जरिए वह दोनों अलग हो सकते हैं।
उसके लिए बेहतर तरीका यह है कि मर्द बीवी को एक तलाक दे जब औरत पाकी की हालत में हो (उसके पीरियड के दिनों में तलाक न दे)
और इद्दत की मुद्दत तीन माहवारी इंतजार करे, हो सकता है इस बीच मियां बीवी फिर से अपने मामले को सुलझा लेवे,और रुजू से पति पत्नी बन जावे।
अगर फिर भी कोई रास्ता न निकले और शौहर इद्दत की मुद्दत में रजुअ न करे तो तीन पीरियड के बाद वह अलग हो जाएंगे।
फिर कभी दोनों राज़ी हो जाए तो दोबारा नया निकाह और महर अदा करके दोनों साथ रह सकते हैं
इस तरह दो बार तक कर सकते हैं.(यानी पहले एक तलाक दी,फिर तीन महीने बाद जुड़ा हो कर फिर शादी की, फिर कुछ ऐसा बड़ा मामला पेश आया तो फिर साफ शब्दों में एक तलाक दी तो इस तरह दो बार तक की गुंजाइश है)और तीसरी बार तलाक दे दी तो उसके बाद कोई गुंजाइश नहीं रह जाती।
ऊपर बताए तरीके (तलाक़े रजई के बाद बाइन और जुदा होने) में औरत का फायदा है उसे हर बार नया महर मिलेगा।
और इस तलाक के तरीके को इस्लाम और शरीअत ने अहसन (सबसे अच्छा ) तरीका बताया और इसकी तारीफ की है।
लेकिन अगर तीन तलाक हो गई, चाहे किसी ने जहालत में एक साथ ही तीन तलाक दे दी,या अलग अलग तीन बार दी,हर सूरत जिसमे तीन तलाक हुई,अब वह दोबारा अपनी बीवी से निकाह नहीं कर सकता।
अब इन दोनों का विवाहित जीवन समाप्त हो गया, अब उनको अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए और इस शौहर/बीबी के अलावा दुनिया के जिस मर्द/औरत से चाहे निकाह करे।
#हलाला
अगर तीन तलाक हो जाने के बाद इद्दत (तीन माहवारी) गुजर जाने के बाद औरत ने किसी दूसरे मर्द से शादी कर ली, और दोनों में मियां बीवी वाला रिश्ता और ताल्लुक भी कायम हो गया, और दोनों मियां बीवी की तरह शादी शुदा जिंदगी गुजारने लगे, और अल्लाह का करना ऐसा हुआ कि उसके इस मौजूदा शौहर का इंतेकाल हो गया या किसी वजह से इस शौहर ने भी तलाक दे कर अलग कर दी तो अब अगर यह औरत चाहे तो इद्दत गुजरने के बाद पहले (साबिक) शौहर से शादी कर सकती है इसी को #हलाला कहते हैं,यानी बीवी पहले वाले हसबैंड के लिए हलाल हो गई।
नोट: ध्यान रहे कि यह निकाह प्री- प्लान किया हुआ न हो, न पहले से तय किया हुआ हो , वरना अगर कोई तय करके, शर्त रखकर हलाला के लिए शादी करे तो ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के रसूल ﷺ ने लानत फरमाई है,और लानत बहुत खतरनाक चीज़ है।
हुजूर ﷺ ने गुस्सा और नाराज होकर फरमाया कि अल्लाह की लानत हो हलाला करने वाले पर (जो शादी, तलाक देने के लिए या औरत के पहले शौहर के लिए हलाल करने के लिए निकाह करे )
और उस पर भी जिसके लिए हलाला किया जाए (वह मर्द जो तलाक की शर्त रखकर या हलाला की नियत से अपनी बीवी की शादी किसी दूसरे मर्द से कराए।
(मुसनदे अहमद:2/323, बैहकी, नसाई, तिर्मिज़ी, अबु दाऊद, दारमी)
उम्मीद है इस तहरीर से हमारे मुस्लिम भाईयों के साथ साथ गैर मुस्लिम भाईयों को भी तलाक और हलाला समझ आएगा,और बहुत सारी गलत फहमियां दूर होगी।

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