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Showing posts from 2020

Aaj ki Honewali maa बहुत ही अहम पोस्ट है, जरूर पढ़िए।

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 बहुत ही अहम पोस्ट है, जरूर पढ़िए। आज हमने एक औलाद और उनकी तर्बीयत पर बात करेंगे सबसे पहले मैं आपको यह बता देती हूं मैं आपको जो भी बात बताती हूं, चाहे दुनिया की हो या दीनी में दीनी किताब में देखकर स्टडी करके बड़े हजरात से मालूमात करके ही बताती हूं, देखें.. आजकल लोग कहते हैं अब कहां नेक फरमाबरदार पहले वाली औलादे बची हैं अब तो अपनी मनमानी करती है, मतलब जाहिर साफ है आप खुद अपनी औलाद को बिगाड़ना चाहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है औलाद की सही तर्बीयत ना होना, अब बताएं सही तर्बीयत कौन करेगा? आसमान से फरिश्ते थोड़ी आएंगे। अपनी औलाद की तरबियत मां के पेट से ही शुरु कर दो फिर इंशाल्लाह वह खुद नेक फरमाबरदार सच्चे होंगे सबसे पहली बात__ आजकल यह होता है हमारी प्रेग्नेंट बहने जो मायके में हो या ससुराल में वह उन पर काम का ज्यादा जोर  नहीं देते ज्यादा से ज्यादा रेस्ट के लिए देते हैं जो कि  देना भी चाहिए और ऑफिशियल वर्क  ऑफिस से उनको पहले ही छुट्टी मिल जाती है तो इस दरमियान वह फ्री रहती हैं जो कि अपना ज्यादातर वक्त Song सुनना, YouTube, Netflix, Instagram, TV इसी में गुजार देती है याद रह...

आर्थिक दृष्ट्या दुर्बल असणाऱ्या घटकांना सरकारी नौकरी तसेच शिक्षण क्षेत्रात 10% आरक्षण EWS Economically Weaker Section

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   आर्थिक दृष्ट्या दुर्बल असणाऱ्या घटकांना सरकारी नौकरी तसेच शिक्षण क्षेत्रात 10% आरक्षण:-  कोणासाठी आहे EWS 10% आरक्षण ? केंद्र सरकार व महाराष्ट्र राज्य सरकारने आर्थिक दृष्ट्या दुर्बल असणाऱ्या लाभार्थ्यांसाठी (EWS – Economically Weaker Section) 10% आरक्षण घोषित केले आहे. ह्या निर्णयानुसार आर्थिक दृष्ट्या दुर्बल असणाऱ्या घटकांना सरकारी नौकरी तसेच शिक्षण क्षेत्रात 10% आरक्षण मिळणार आहे. तसेच ह्या प्रवर्गातील लाभार्थ्यांना वय, परीक्षा फी, व इतर सवलतीचा लाभ मिळेल. काय आहेत EWS 10% आरक्षणासाठी पात्रता निकष (राज्य सरकार) ? अर्जदाराच्या कुटुंबाचे (वडील, आई व 18 वर्षाखालील मुले) यांचे सर्व स्रोतांपासून चे एकत्रित उत्पन्न 8 लाखांपेक्षा कमी असावे.​ आरक्षणाचा लाभ घेण्यासाठी ती व्यक्ती किंवा त्यांचे कुटुंबातील सदस्य 13 ऑक्टोबर 1967 रोजी किंवा त्या आधीचे महाराष्ट्राचे रहिवाशी असणे आवश्यक आहे. इतर कुठल्याही प्रवर्गाअंतर्गत ( जसे की SC, ST, OBC, ESBC ) येणाऱ्या लाभार्थ्यांना EWS आरक्षणास पात्र नाहीत EWS प्रमाणपत्र मिळवण्यासाठी आवश्यक कागदपत्र. लाभार्थी व त्यांच्या वडिलांचे आधार कार्ड. ...

लॉक डाउन में ईद उल अज़ह़ा की नमाज़ घर में कैसे अदा करें?Eid ul Adha Namaz in Lockdown 2020

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 लॉक डाउन में ईद उल अज़ह़ा की नमाज़ घर में कैसे अदा करें? ?  ईद की नमाज़ 2 रकअ़त अदा की जाएगी, इमाम पहली रकअ़त के लिए तकबीर ए तह़रीमा कहे और आहिस्ता से दुआ़ ए इस्तिफताह़ (दुआ ए सना) पढे, फिर बुलन्द आवाज़ से मजी़द सात तकबीरात (अल्लाहु अकबर) कहे (बअ़ज़ रिवायतों में सहीह सनद के साथ छ तकबीरात का भी ज़िक्र है, लिहाज़ा छ या सात जिस पर दिल मुतमइन हो वो कहे ) इसके बाद जहरन (बुलन्द आवाज़) से सूरह फातिहा़ (अल ह़मदुलिल्लाहि रब्बिल आ़लमीन) पढे, फिर इसके बाद सूरह क़ाफ या सूरह अअ़ला या क़ुरआन से जो याद हो वो पढे, फिर रुकूअ़ व सुजूद के बाद दूसरी रकअ़त के लिए खड़ा हो, फिर पहले बुलन्द आवाज़ से पॉच ज़ाइद तकबीरात (अल्लाहु अकबर) कहे और जहरन (बुलन्द आवाज़) से सूरह फातिहा़ की किरत के बाद सूरह क़मर या सूरह ग़ाशिया या कोई दूसरी सूरत पढ़े और रुकूअ़ व सुजूद के बाद सलाम फेर ले, खुतबे के आदाब को सामने रखते हुए अगर खुतबा दे सकता है तो दे वरना खुतबा न दे.  *नोट:  ईद उल अज़ह़ा की नमाज़ का वक्त 6:15 से शुरू हो जाता है लिहाज़ा अव्वल वक्त में अपने अपने घर में नमाज़े ई़द को अदा करें*    नेकी...

MAH SSC Result 2020 LIVE | आज दहावीचा निकाल

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MAH SSC Result 2020 LIVE | आज दहावीचा निकाल राज्यातील दहावी परीक्षेचा निकाल आज जाहीर (Maharashtra SSC Results 2020) होणार आहे. विद्यार्थ्यांना बोर्डाच्या वेबसाईटवर दुपारी एक वाजल्यापासून निकाल ऑनलाईन पाहता येईल. www.mahresult.nic.in        महाराष्ट्र राज्य बोर्डाचा दहावीचा निकाल आज जाहीर केला जाणार आहे. आज बोर्डाच्या वेबसाईटवर दुपारी 1 वाजता निकाल विद्यार्थ्यांना पाहता येणार आहे. गेल्या अनेक दिवसांपासूनची विद्यार्थ्यांची आणि पालकांची आता प्रतीक्षा संपली आहे.    विद्यार्थ्यांना बोर्डाच्या   www.mahresult.nic.in  या अधिकृत वेबसाईटवर दहावीचा निकाल पाहता येईल. यावर्षी दहावीची लेखी परीक्षा 3 मार्च ते 23 मार्च या काळात आयोजित करण्यात आली होती. दहावीच्या परीक्षेसाठी राज्यभरातून 17 लाख 65 हजार 898 विद्यार्थ्यांनी नोंदणी केली होती. यापैकी 9 लाख 75 हजार 894 विद्यार्थी तर 7 लाख 89 हजार 894 विद्यार्थीनी होत्या. राज्यातील एकूण 22 हजार 586 माध्यमिक शाळांमधून या विद्यार्थ्यांची नोंदणी झाली होती. तर 4979 परीक्षा केंद्रांवर दहावीची परीक्षा घेण्यात आली होती. बोर्डा...

जब कूरान पर पाबंदी लगी- France or China May be cause of corona virus

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जब कूरान पर पाबंदी लगी 1973 में रूस में कम्युनिज़्म का तूती बोलती थी बल्कि दुनिया तो यह कह रही थी कि बस अब पूरा एशिया सुर्ख(लाल) हो जाएगा, उन दिनों एक शख्स (मुसन्निफ़) मास्को ट्रेनिंग के लिए ग‌ए थे, वह कहते हैं कि जुमा के दिन मैंने दोस्तों से कहा कि चलो जुमा अदा करने की तैयारी करते हैं, तो उन्होंने कहा कि यहां मस्जिदों को गोदाम बना दिया गया है सिर्फ दो  ही मस्जिद इस शहर में बचें है जो कभी बन्द कभी खुले होते है। मैंने कहा: आप मुझे मसाजिद का पता बता दें, मैं वहीं चला जाऊंगा। पता लेकर जब मस्जिद पहुंचा तो मस्जिद बन्द थी, मस्जिद के पड़ोस में ही एक बन्दे के पास चाभी थी, मैंने उसे खोलने को कहा तो उसने कहा दरवाज़ा तो मैं खोल दुंगा लेकिन अगर आपको कोई नुक़सान पहुंचा तो मैं ज़िम्मेदार नहीं होऊंगा। मैंने कहा देखिए जनाब मैं अपने मुल्क में भी मुसलमान था और रूस के मास्को में भी मुसलमान हुं, वहां भी नमाज़ पढ़ता था और रूस के मास्को में भी नमाज़ अदा करूंगा चाहे कुछ भी हो जाए। उसने मस्जिद का दरवाजा खोला और मैंने जल्दी से सफ़ाई की और बुलन्द आवाज से अज़ान दीं।----- अज़ान की आवाज़ सुनकर बुढ़े, बच्...

Chatrapati Shivaji Maharaj -The Maratha King

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Kya Shivaji Maharaj Muslim virodhi the? शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्योंकि वे मुस्लिम विरोधी थे या वे ब्राह्मणों या गायों की पूजा करते थे. वे जनता के प्रिय इसलिए थे क्योंकि उन्होंने किसानों पर लगान और अन्य करों का भार कम किया था। शिवाजी के प्रशासनिक तंत्र का चेहरा मानवीय था और वो धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता था. सैनिक और प्रशासनिक पदों पर भर्ती में शिवाजी धर्म को कोई महत्व नहीं देते थे. उनकी सेना के एक तिहाई सैनिक मुसलमान थे. उनकी जलसेना का प्रमुख सिद्दी संबल नाम का मुसलमान था और उसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम सिद्दी थे। शिवाजी ने स्थानीय हिंदू राजाओं के साथ ही औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ भी लड़ाइयां लड़ीं. दिलचस्प बात यह है कि शिवाजी की सेना से भिड़ने वाली औरंगज़ेब की सेना का नेतृत्व मिर्ज़ा राजा जयसिंह के हाथ में था, जो कि राजपूत थे और औरंगज़ेब के राजदरबार में उच्च अधिकारी थे। जब शिवाजी आगरा के किले में नज़रबंद थे तब क़ैद से निकल भागने में जिन दो व्यक्तियों ने उनकी मदद की थी, उनमें से एक मुसलमान था जिसका नाम मदारी मेहतर था. शिवाजी के गुप्तचर मामलों के सचिव मौलाना है...

Maulana Abul Kalam Azad

मौलाना अबुल कलाम आजाद💐 ----------------------------------- बटवारे का विरोध देश में हो रह बटवारे की बात का मौलाना साहब हमेशा से ही विरोध करते थे. वह उन सभी व्यक्तियों का विरोध करते थे जो अलग पाकिस्तान बनाने की बात करते थे. विरोध करने वाले प्रमुख नेता अलग पकिस्तान बनाने की बात का विरोध करने वाले मौलाना साहब सबसे प्रमुख नेता थे. वह सदैव सभी को एक जुट होने की बात किया करते थे. भारत के पहले शिक्षामंत्री भारत की आजादी के बाद मौलाना साहब भारत के पहले शिक्षामंत्री बने. भारत रत्न 1992 में मौलाना साहब  मरणोपरांत भारत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित हुए है. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भारत रत्न से सम्मानित देश के पहले शिक्षा मंत्री की याद में प्रतिवर्ष 11 नवंबर का दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में भारत सरकार मनाती है. लेकिन आधिकारिक रूप से11 नवम्बर 2008 से इस खास दिन की शुरुआत की गई थी. मृत्यु 70 वर्ष की उम्र में मौलाना साहब हम सब से रुखसत हो गए. 22 फरवरी 1958 का वह दिन उनकी जिंदंगी का अंतिम दिन था.

Fikr-E-Millat

Fikr-E-Millat मौलाना मुज़क्किर नदवी  के  उर्दू लेख का हिन्दी रुपांतरण #मदरसों_में_बहादुर_नहीं_एक_बुजदिल_क़ौम_तैयार_की जाती है*  इस समय सबसे ज्यादा बुजदिली का प्रदर्शन मदरसे वालों ने किया है। 20 से 30 साल तक की उम्र के तलबा मदरसे से निकलते हैं। जिस उम्र में लोग दुनिया में इंकलाब लाते हैं उस उम्र के तलबा से कहा जाता है कि _आप सिर्फ अपनी शिक्षा पर ध्यान दो, आप को दुनिया में क्या हो रहा है इससे कोई लेना-देना नहीं। मदरसे के बाहर आपको नहीं जाना है क्योंकि बाहर की फिजा बहुत खराब है।_  हमने सुना था कि  मोहम्मद बिन कासिम ने 17 साल की उम्र में मुल्क फतह कर लिया था। अकबर बादशाह 14 साल की उम्र में सिंघासन पर विराजमान हो गया था। मगर मदरसों में पढ़ रहे 25 - 30 साल के विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वह बस अपनी शिक्षा पर ध्यान दें। क्या इससे बड़ी मूर्खता कोई हो सकती है ??? जो उम्र कुछ कर गुजरने की थी। उसमें उनके हाथ पैर काट दो, उनके सोचने और समझने की सलाहियतों को समाप्त कर दो और जब यह बूढ़े हो जाएं तो इनको ऊँचे ओहदों पर बिठा दो ताकि अब यह दूसरों को अपाहिज करने में लग जाए...