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Showing posts from 2019

Masjid in Bhopal अगर आप साल भर तक, हर रोज़ एक नई मस्जिद में नमाज़ अदा करना चाहें तो भोपाल आ जाइए ।

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अगर आप साल भर तक, हर रोज़ एक नई मस्जिद में नमाज़ अदा करना चाहें तो भोपाल आ जाइए । अगर आप साल भर तक, हर रोज़ एक नई मस्जिद में नमाज़ अदा करना चाहें तो भोपाल आ जाइए । भोपाल ऐसा शहर है जहाँ एशिया की सबसे छोटी मस्जिद से लेकर एशिया की छठी सबसे बड़ी मस्जिद भी आपको मिलेगी । 'द रॉयल जर्नी ऑफ भोपाल' के लेखक अख्तर हुसैन के अनुसार भोपाल ने डेढ़ सौ बरस पहले ही 365 मस्जिदों का आंकड़ा हासिल कर लिया था, तब इस्लामी देशों के किसी शहर में भी इतनी मस्जिदें नहीं थी । मस्जिदों की गिनती के लिहाज से भारतीय उपमहाद्वीप में आज भोपाल का दूसरा स्थान है बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बाद ।यहाँ दरख्तों के नाम पर, बागों के नाम पर, औरतों के नाम पर मस्जिदें हैं; मस्जिदों में मस्जिद है ...ये मस्जिदों का शहर है ।ग्यारहवीं सदी की शुरुआत में मालवा के परमार वंश के शासक राजा भोज ने भोजपाल नाम की एक बस्ती को आबाद किया था । यही बस्ती बाद में भोपाल के नाम से प्रसिध्द हुई । राजा भोज के शासनकाल के लगभग सात सौ साल बाद सत्रहवीं शताब्दी की शुरुआत में एक साहसी अफगान भोपाल आया जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद ख़ान । वह अफगानिस्...

From New to Old Technology is not solutions to every problem

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From New to Old  and हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापिस उनकी ही राह पर फिर से आना पड़ रहा है। 1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना। 2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना। 3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना। 4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना । 5. ज्यादा मेहनत वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना। 6.  क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना। 7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना। 8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के ...

मुग़ल बादशाह जहांगीर Mughal King Jahangir

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Mughal King Jahangir Death on October 28 1627 28 अक्टूबर 1627  के दिन मुग़ल बादशाह जहांगीर की वफ़ात हुई। जहांगीर अपने आखरी दिनों में बहुत बीमार हो गये थे जबकि उनकी उम्र 58 साल ही थी। अपनी बीमारी ठीक करने के लिए महल छोड़कर शांत इलाकों की ओर रुख किया क़ाबुल से कश्मीर के तरफ चले गये। कश्मीर की सख़्त सर्दी जहांगीर से बर्दाश्त नही हुई वापस लाहौर का रुख किया लेकिन सफर में ही सराय सादाबाद में जहांगीर का इंतेक़ाल हो गया। कश्मीर के बगसर फोर्ट में उन्हें दफन कर दिया गया। बाद में जब शाहदरा बाग लाहौर में उनके बेटे खुर्रम यानी शाहजहां ने एक खूबसूरत मक़बरे की तामीर का हुक्म दिया। जहांगीर के मकबरे की तामीर पूरी हो गयी जुमा के दिन, 12 नवंबर 1627 को वापस जहाँगीर की कब्र को कश्मीर से लाहौर लाया गया और इसी मक़बरे में फिर से दफन किया गया। जहांगीर के मौत के बाद खुर्रम (शाहजहां) अगले मुग़ल बादशाह बने।

आखरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र Last Mughal Empire King Bhadur sha Zafar and Indias Freedom fighter

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Last Mughal Empire King Bhadur sha Zafar and UndIndi freedom fighter https://youtu.be/8rrws1ebvRg 24 अक्टूबर 1775 आज ही के दिन आखरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र का जन्मदिन है, वो बादशाह जिसने अपने बच्चों के सर कटते देखकर भी अंग्रेजी की गुलामी मंज़ूर नही की औऱ ख़ुद ताउम्र हिंदुस्तान से दूर सज़ा काटी और वही दफन भी हो गए। वो चाहते तो  और राजा महाराजाओं की तरह घुटने टेक कर अब तक अपनी बेशुमार दौलत पर राज़ करते। आज उनकी भी औलादें मंत्री या सांसद होते पर मुग़लों के खून में कभी गुलामी नही थी। सर कटाना पसंद था पर झुकना नही...😢 कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें, इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में। दिन ज़िन्दगी खत्म हुए शाम हो गई, फैला के पांव सोएंगे कुंज-ए-मज़ार में। आज अंग्रेजों से माफी मांगने वाले देशभक्त हो गए और सर कटने वाले लुटेरे देशद्रोही हो गए, नफ़रत इतनी की मुग़लों के बसाये शहरों के नाम बदलने की होड़ लगी है.. Like and share with subscribe for information Visit our chanel https://youtu.be/8rrws1ebvRg

शहीद अशफाकउल्लाखां Indian Freedom fighter Shahid Ashfaque ulla Khan

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जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलाएगा ! शहीद अशफाकुल्लाह खां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी सेनानी और 'हसरत' उपनाम से उर्दू के अज़ीम शायर थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक ने अपनी किशोरावस्था में  ही अपना जीवन वतन की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। वे क्रांतिकारियों के उस जत्थे के सदस्य थे जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, मन्मथनाथ गुप्त, राजेंद्र लाहिड़ी, शचीन्द्रनाथ बख्सी, ठाकुर रोशन सिंह, केशव जी चक्रवर्ती, बनवारी लाल, मुकुंदी लाल शामिल थे।  8 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर में रामप्रसाद बिस्मिल और चन्द्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में इस क्रांतिकारी जत्थे की एक अहम बैठक हुई जिसमें अपने क्रांति अभियान हेतु हथियार खरीदने के लिए ट्रेन से सरकारी ख़ज़ाने को लूटने की योजना बनी। उनका मानना था कि यह वह धन अंग्रेजों का नहीं था, अंग्रेजों ने उसे भारतीयों से ही हड़पा था। 9 अगस्त, 1925 को अशफाकउल्ला खान और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आठ क्रांतिकारियों के दल ने सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन से अंग्रेजों का खजाना लूट लिया। अंग्र...

अलाउद्दीन खिलजी Alauddin Khilji The best ruler for economic History of India -The Cambridge Economic History of India.

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Alauddin Khilji The best ruler for economic History of India -The Cambridge Economic History of India.  दिन 21 अक्टूबर 1296 को अलाउद्दीन खिलजी ने इलाहाबाद के पास जिला कोशांबी कड़ा नाम की जगह पर सुल्तान की ताजपोशी हुई।  चाचा जलालुद्दीन ख़िलजी का क़त्ल कड़ा में ही हुआ, क़त्ल के कुछ महीनों बाद अलाउद्दीन दिल्ली का सुल्तान बना। तब ईलाहाबाद का  कोई नमो निशान नही था कौशाम्बी जौनपुर की राजधानी हुआ करती थी सुल्तान बनने से पहले अलाउद्दीन यहा का गवर्नर था और यही से पूरे अवध का संचालन करता था। सुल्तान बनते ही अलाउद्दीन ने दिल्ली का रुख किया तब दिल्ली का महरौली का इलाका दिल्ली का मुख्य शहर था। यही क़ुतुबमीनार की तामीर भी हुई। सुल्तान बनते ही अलाउद्दीन सबसे टैक्स सिस्टम को सुधारा जिससे बिचौलियों को हटाकर सीधे आम आदमी से जोड़ा बिचौलियों के हटने किसानों और गरीबो को बहोत फायदा हुआ। इस टैक्स सिस्टम को शेर शाह सूरी से लेकर मुग़लों तक ने इस्तेमाल किया। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की किताब  "The Cambridge Economic History of India" में लिखा है ख़िलजी का यह टैक्स सिस्टम हिंदुस्तान सबसे अच्...

Chatrapati Shivaji Maharaj The great Maratha King

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Chatrapati Shivaji Maharaj People likes Because:- शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्योंकि वे मुस्लिम-विरोधी थे:- शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्योंकि वे मुस्लिम-विरोधी थे या वे ब्राह्मणों या गायों की पूजा करते थे. वे जनता के प्रिय इसलिए थे क्योंकि उन्होंने किसानों पर लगान और अन्य करों का भार कम किया था. शिवाजी के प्रशासनिक तंत्र का चेहरा मानवीय था और वह धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता था. सैनिक और प्रशासनिक पदों पर भर्ती में शिवाजी धर्म को कोई महत्व नहीं देते थे. उनकी सेना के एक तिहाई सैनिक मुसलमान थे. उनकी जलसेना का प्रमुख सिद्दी संबल नाम का मुसलमान था और उसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम सिद्दी थे. दिलचस्प बात यह है कि शिवाजी की सेना से भिड़ने वाली औरंगजेब की सेना का नेतृत्व मिर्जा राजा जयसिंह के हाथ में था, जो कि राजपूत था. जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्यक्तियों ने उनकी मदद की थी, उनमें से एक मुसलमान था जिसका नाम मदारी मेहतर था.उनके गुप्तचर मामलों के सचिव मौलाना हैदर अली थे और उनके तोपखाने की कमान इब्राहिम गर्दी के ...

Muslim Ruler Changej Khan's Grandson Barek khan

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Muslim Ruler Changej Khan's Grandson Barek khan :- महान मंगोल शासक चंगेज़ खान का पोता शहज़ादा बरके ख़ान एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था। उसने देखा कि एक बुज़ुर्ग जिसकी दाढ़ी है, वह सो रहा है और बराबर में एक कुत्ता भी सो रहा है, शहज़ादे ने सवारी से उतर कर शरारत की और बुज़ुर्ग के चेहरे पर अपना पैर रख कर खड़ा हो गया। दाढ़ी देख कर हिकारत से बोला :- "बता तू अच्छा या यह कुत्ता अच्छा"? बुज़ुर्ग ने बड़े तपाक से जवाब दिया कि अगर मेरी मौत ईमान पर हुई तो मै अच्छा; वर्ना यह कुत्ता अच्छा..! यह जवाब सुनकर शहज़ादे के साथ आये खड़े हुए लोगों में सुकूत तारी हो गया, बरके ख़ान के पैर में लरज़ा तारी हो गया। उसने पैर हटा लिया और बुज़ुर्ग को बा इज़्ज़त खड़ा करके पूछा, यह ईमान क्या चीज़ है ? बुज़ुर्ग ने कहा कि यह वह दौलत है जिसे न तुम्हारा दादा लूट सका और न यह तुम्हारे हाथ आएगी, चाहे तुम सौ साल हुकूमत कर लो। शहज़ादे ने कहा लेकिन मुझे वह चाहिये। बुज़ुर्ग ने कहा कि अभी आप इस ईमान की दौलत को नही संभाल सकते। शहज़ादे ने अपने हाथ से अंगूठी निकाल कर दी और बोला कि जब मै बादशाह बनूंगा तब आप...

Hazrat Umar R.A ke Char swal ke jawab

Hazrat Umar bin Khatab R.A ke  Char Sawal ke Jawab एक ईसाई बादशाह ने “हजरत उमर रज़ी अल्लाहु अन्हु” चार कठिन सवाल पूछे , पढ़िए कैसे जवाब दिया उस बादशाह को चार सवाल चार जवाब | एक निसरानी ( ईसाई ) बादशाह ने चार सवाल लिख कर हजरत उमर रज़ी अल्लाहु अन्हु के पास भेजा। उनके जवाब आसमानी किताबों में से देने का मुतालबा किया। सवाल ये हैं 1: एक माँ के पेट से दो बच्चे एक ही दिन एक ही वक्त पैदा हुए।। फिर दोनों का इंतिकाल भी एक ही दिन हुआ एक भाई की उम्र सो साल बड़ी और दुसरे की उम्र सौ साल छोटी हुई। ये कौन थे…? और ऐसा किस तरह हुआ…? 2: वो कौन सी जमीन है जहां शुरुआत से कयामत तक सिर्फ एक बार सूरज की किरने लगीं।।। न पहले कभी लगीं थी न अब कभी लगेंगी….? 3: वो कौन सा कैदी है जिसकी कैदखानें में सांस लेने की इजाजत नहीं और वो बगैर सांस लिए जिंदा रहता है….? 4: वो कौन सी कबर है जिसका मुर्दा भी जिंदा और कबर भी जिंदा और कबर अपने अंदर दफन हुए को सैर कराती फिरती थी फिर वो मुर्दा कबर से बाहर निकल कर ज़िंदा रहा और कुछ दिनों बाद वफात पाया…? हजरत उमर रज़ी अल्लाहु अन्हु ने हजरत अब्दुल्लाह बिन अब...

Modern Medicine - Islamic Scholar

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इब्न सीना - इब्न सीना का पूरा नाम अली अल हुसैन बिन अब्दुल्लाह बिन अल-हसन बिन अली बिन सीना है | इनकी गणना इस्लाम के प्रमुख डाक्टर और दर्शिनिकों में होती है पश्चिम में इन्हें अवेसेन्ना (avicenna) के नाम से जाना जाता है ये इस्लाम के बड़े विचारकों में से थे ,इब्न सीना ने 10 साल की उम्र में ही कुरआन हिफ्ज़ कर लिया था | बुखारा के सुलतान नूह इब्न मंसूर बीमार होगये किसी हकीम की कोई दवाई कारगर शाबित न हुई 18 साल की उम्र में इब्न सीना ने उस बीमारी का इलाज़ किया जिस से तमाम नामवर हकीम तंग आ चुके थे.. इब्न सीना की दवाई से सुल्तान इब्न मंसूर स्वस्थ हो गये ,सुल्तान ने खुश हो कर इब्न सीना को पुरस्कार रूप में एक पुस्तकालय खुलवा कर दिया अबू अली सीना की स्मरण शक्ति बहुत तेज़ थी उन्होंने जल्द ही पूरा पुस्तकालय छान मारा और जरूरी जानकारी एकत्र कर ली फिर 21 साल की उम्र में अपनी पहली किताब लिखी| अबू अली सीना ने 21 बड़ी और २४ छोटी किताबें लिखीं लेकिन कुछ का मानना है कि उन्होंने 99 किताबों की रचना की | उनकी गणित पर लिखी 6 पुस्तकें मौजूद हैं जिनमे "रिसाला अल-जराविया ,मुख्तसर अक्लिद्स,अला रत्मातैक...

Islam me Aurat ka Makkam

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इस्लाम मे औरत का मकाम      मुसलमान औरत के कफ़न में 5 और मर्द के कफ़न में कपड़े के 3 तुकडे होते है।      औरत के कफ़न के 2 तुकडों में एक रुमाल (Head Scarf) और दुसरा कपड़ा सीना-बंद (सीने को ढाॅकने के लिए) होता है।      पर अफ़सोस है उस मुसलमान औरत पर जो जिंदगी भर अपना सर और सीना खुला करके चलने में फक्र महसुस करती है, लेकिन मरने के बाद अल्लाह तआला ये दोनों चीज़ों को ढकवा कर अपने पास बुलवाता है।      ये मुसलमान औरत अफसोस है तुझ पर के अल्लाह तआला तुझ से कितनी हया करते है पर शैतान के बेहकावे में आ कर तु सारी जिंदगी अल्लाह तआला से हया नही करती       औरते के अज़ाब    12 गुनाहगार औरतें रब के अज़ाब से नही बच सकती।     1- बे-परदा     2- तेज़ ज़ुबान वाली     3- हर वक्त मौत मांगने वाली     4- दीन (मजहब) का मजाक उड़ाने वाली     5- चुगल खोर     6- एहसान जताने वाली     7- शौहर की ना-फरमान     8- गीबत करने वाली     9-...

Wo panch Ghar jis me Rahemat ke Farishte Dakhil nahi hote

जानिए वो पांच (5) घर जिन में रेहमत के फरिश्ते दाखिल नहीं होते…? ज़रूर पढ़ें और शेयर करें जानिए वो पांच (5 ) घर जिन में रेहमत के फरिश्ते दाखिल नहीं होते…? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ) की कुछ अहादीस उन घरो के ताल्लुक से जहा रेहमत के फरिश्ते दाखिल नहीं होते ,.. 1). क़ता रही करने (यानि रिश्तेदारियां तोड़ने ) वाले का घर . – (अल -अदब अल -मुफरद अल -बुखारी : 63) (Al-अल्बानी ) 2). जिस घर में कुत्ता हो . – (सहीह बुखारी : 3225) 3). जिस घर में जानदार की तसवीर या मूर्तियां हो . – (सुनन अन -नसाई : 262) 4). जिस घर में मौसिक़ी और नाच गाने का सामान हो . – (सुनन अन -नसाई : 5222) 5). जिस घर में जुंबी हो (यानि ऐसा शख्स जो ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो जाने के बाद भी गुसल न करे .) – (सुनन अन -नसाई : 262) हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें… अल्लाह तआला हम सब को कहने , सुनने और पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाये और नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताये हुए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये अमीन |

Teacher Day why Teachers Day celebrate

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Teacher's day . Why Teacher's day celebrates in India ? ہندوستان میں ٹیچر ڈے کیوں منایا جاتا ہے۔ اساتذہ کا دن 2019: صدر ڈاکٹر سروپلی رادھا کرشنن ویرسوامی کی یوم پیدائش کے موقع پر ، ہندوستان 5 ستمبر کو اساتذہ کا یوم منایا جاتا ہے۔ کہا جاتا ہے کہ جب ڈاکٹر رادھا کرشنن صدر بنے تھے (1962-1967) ، ان کے طلباء اور دوستوں نے ان کی سالگرہ منانے کی خواہش کی تھی۔ تاہم ، ان کی عاجزانہ طبیعت کے لئے مشہور ، انہوں نے درخواست کی ، "اگر میری سالگرہ منانے کے بجائے ، یہ میرے فخر کی سعادت ہوگی کہ 5 ستمبر کو اساتذہ کا دن منایا جاتا ہے۔" تب سے اس کی سالگرہ کو اساتذہ کا دن منایا جاتا ہے۔

Happy Teacher's Day in urdu

Happy Teacher's Day in urdu  Qoutes on Teacher's and on teacherTe day day special Quetes دنیا کے لئے ، آپ صرف ایک استاد ہوسکتے ہیں ، لیکن آپ کے طلباء کے ل for ، آپ ہیرو ہیں۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! آپ کے طلباء کی زندگی میں رہنمائی روشنی بننے کے لئے آپ کا شکریہ۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! جب لوگ مجھ سے میرے استاد کے بارے میں پوچھتے ہیں تو مجھے خود کو اپنا طالب علم کہنے پر بے حد فخر محسوس ہوتا ہے۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! اساتذہ کے بغیر ، کوئی بھی واقعی میں اپنے خوابوں اور اہداف کا ادراک نہیں کرسکتا۔ شکریہ ، استاد ، کامیابی کے راستے پر مجھے مسلسل رہنمائی کرنے کے لئے۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! اگر اسکول ایک مندر ہے ، تو اساتذہ خدا ہیں۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! محترم استاد ، میں آج جو بھی ہوں ، میں اس کا آپ کا مقروض ہوں۔ آپ کی رہنمائی اور استقامت کے بغیر ، میں زندگی میں یہ کامیابی حاصل نہیں کرسکتا تھا۔ اساتذہ کا عالمی دن مبارک! آپ ہمیشہ ہی اپنے طلبا کے لئے سب سے بڑا الہامی ذریعہ رہے ہیں۔ ان تمام سالوں کے بعد بھی ، ہم جانتے ہیں کہ اگر ہمیں کسی مدد کی ضرورت ہے تو...

Happy Teacher's Day

TEACHERS' DAY : HERE ARE SOME WISHES, MESSAGES, QUOTES, WHATSAPP AND FACEBOOK STATUS TO SHARE WITH YOUR TEACHERS To the world, you may be just a teacher, but for your students, you are a hero. Happy Teachers' Day! Thank you for being the guiding light in the lives of your students. Happy Teachers' Day! When people ask me about my teacher, I feel immensely proud to call myself your student. Happy Teachers' Day! Without teachers, one cannot truly realise and achieve their dreams and goals. Thank you, teacher, for constantly guiding me on the path of success. Happy Teachers' Day! If school is a temple, then teachers are Gods. Happy Teachers' Day! Dear teacher, whatever I am today, I owe it to you. Without your guidance and persistence, I would not have been able to achieve this success in life. Happy Teachers' Day! You have always been the greatest source of inspiration for your students. Even after all these years, we know that if we need any help...

Teacher's Day speech in Urdu

I am Teacher I am proud of a Teacher میں استاد ہوں مجھے ایک استاد پر فخر ہے۔ مجھے فخر ہے کہ وہ افراد کے اس گروپ کا حصہ ہوں جو وہ نوکری اور طالب علم کی محبت کے لئے کرتے ہیں ، ڈالر کی خواہش کے لئے نہیں۔ مجھے فخر ہے کہ میں اس پیشے کا حصہ ہوں جہاں ہمارے روزانہ ’ملازمین‘ ایک سال تک ہماری نگہداشت میں ہیں۔ پھر بھی پانچ ، دس ، یہاں تک کہ بیس سال بعد ، وہ واپس آئیں ، خاص طور پر آپ کی امید میں تلاش کر رہے ہیں کہ ، "شکریہ۔" مجھے فخر ہے کہ ان ساتھیوں کو حاصل کیا جو مجھے بہتر استاد بننے کے لئے ہر دن مائل کرتے ہیں۔ مجھے فخر ہے کہ میں اس مقام پر ہوں جہاں کبھی کبھی میں ضرورت مند لوگوں کے لئے ایک سرپرست ہوں ، کندھے پر رونے کے لئے جب کوئی دوسرا نہیں سنتا ہے ، یا اس راہ میں رہنمائی کرنے میں مدد کرنے کے لئے ایک اتھارٹی کی ایک بہت ضروری شخصیت ہے۔ مجھے فخر ہے کہ میں ایسی نوکری کا حصہ بنوں جو کسی نوکری کی طرح محسوس نہیں ہوتا ہے۔ جہاں ہر روز ، چاہے میں کیسا محسوس کر رہا ہوں ، میرے پاس ایسے طلبا موجود ہیں جو مجھے دیکھ کر خوش ہیں اور محبت کرتے ہیں کہ میں وہاں ہوں۔ مجھے فخر ہے کہ میں ای...

हलाला क्या है ? मीडिया क्या बता रहा है ? और हम क्या समझ रहे हैं ? What is Halala? What media Showing? and What We Understand?

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#हलाला क्या है ? मीडिया क्या बता रहा है ? और हम क्या समझ रहे हैं ? मैंने बहूत सारे मुस्लिम भाईयों के लेख हलाला के बारे में देखे , पढ़े , उनमें से अकसर में हलाला को उसी तरह समझाया गया है जो इस्लाम और मुस्लिम विरोधी मीडिया,सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है, जिसमें झूठ, फरेब और प्रोपेगैंडा के सिवा कुछ नहीं है।  एक बात समझ लीजिए कि टीवी चैनलों के जरिए दिखाए  और बताए जा रहे हलाला की न तो इस्लाम में कोई हकीकत है और न किसी भी हालत में इजाजत है,बल्कि यह तो सरासर लानती अमल है। हलाला किसे कहते हैं ? " #तलाक " अल्लाह तआला के नज़दीक जायज और हलाल चीजों में सबसे नापसंद चीज़ है.(अबु दाऊद)  हदीस में आता है हुजूर ﷺ ने फरमाया : " शादियां करो और तलाक मत दो, तलाक देने से अल्लाह का अर्श हिल जाता है" (इब्ने अदी जम्उल फवाईद)   लेकिन चूँकि इंसान की शादीशुदा जिंदगी में न चाहते हुए भी कभी ऐसे हालात बन जाते हैं कि मेल मिलाप और सुलझाने समझाने की कोशिश के बावजूद शोहर बीवी का एक साथ रहना मुश्किल हो जाता है और अब यकीन हो जाए कि किसी तरह निबाह मुम्किन नहीं तो इस्लाम ने इज...