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Fikr-E-Millat

Fikr-E-Millat मौलाना मुज़क्किर नदवी  के  उर्दू लेख का हिन्दी रुपांतरण #मदरसों_में_बहादुर_नहीं_एक_बुजदिल_क़ौम_तैयार_की जाती है*  इस समय सबसे ज्यादा बुजदिली का प्रदर्शन मदरसे वालों ने किया है। 20 से 30 साल तक की उम्र के तलबा मदरसे से निकलते हैं। जिस उम्र में लोग दुनिया में इंकलाब लाते हैं उस उम्र के तलबा से कहा जाता है कि _आप सिर्फ अपनी शिक्षा पर ध्यान दो, आप को दुनिया में क्या हो रहा है इससे कोई लेना-देना नहीं। मदरसे के बाहर आपको नहीं जाना है क्योंकि बाहर की फिजा बहुत खराब है।_  हमने सुना था कि  मोहम्मद बिन कासिम ने 17 साल की उम्र में मुल्क फतह कर लिया था। अकबर बादशाह 14 साल की उम्र में सिंघासन पर विराजमान हो गया था। मगर मदरसों में पढ़ रहे 25 - 30 साल के विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वह बस अपनी शिक्षा पर ध्यान दें। क्या इससे बड़ी मूर्खता कोई हो सकती है ??? जो उम्र कुछ कर गुजरने की थी। उसमें उनके हाथ पैर काट दो, उनके सोचने और समझने की सलाहियतों को समाप्त कर दो और जब यह बूढ़े हो जाएं तो इनको ऊँचे ओहदों पर बिठा दो ताकि अब यह दूसरों को अपाहिज करने में लग जाए...