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Showing posts from October, 2019

From New to Old Technology is not solutions to every problem

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From New to Old  and हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापिस उनकी ही राह पर फिर से आना पड़ रहा है। 1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना। 2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना। 3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना। 4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना । 5. ज्यादा मेहनत वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना। 6.  क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना। 7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना। 8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के ...

मुग़ल बादशाह जहांगीर Mughal King Jahangir

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Mughal King Jahangir Death on October 28 1627 28 अक्टूबर 1627  के दिन मुग़ल बादशाह जहांगीर की वफ़ात हुई। जहांगीर अपने आखरी दिनों में बहुत बीमार हो गये थे जबकि उनकी उम्र 58 साल ही थी। अपनी बीमारी ठीक करने के लिए महल छोड़कर शांत इलाकों की ओर रुख किया क़ाबुल से कश्मीर के तरफ चले गये। कश्मीर की सख़्त सर्दी जहांगीर से बर्दाश्त नही हुई वापस लाहौर का रुख किया लेकिन सफर में ही सराय सादाबाद में जहांगीर का इंतेक़ाल हो गया। कश्मीर के बगसर फोर्ट में उन्हें दफन कर दिया गया। बाद में जब शाहदरा बाग लाहौर में उनके बेटे खुर्रम यानी शाहजहां ने एक खूबसूरत मक़बरे की तामीर का हुक्म दिया। जहांगीर के मकबरे की तामीर पूरी हो गयी जुमा के दिन, 12 नवंबर 1627 को वापस जहाँगीर की कब्र को कश्मीर से लाहौर लाया गया और इसी मक़बरे में फिर से दफन किया गया। जहांगीर के मौत के बाद खुर्रम (शाहजहां) अगले मुग़ल बादशाह बने।

आखरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र Last Mughal Empire King Bhadur sha Zafar and Indias Freedom fighter

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Last Mughal Empire King Bhadur sha Zafar and UndIndi freedom fighter https://youtu.be/8rrws1ebvRg 24 अक्टूबर 1775 आज ही के दिन आखरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र का जन्मदिन है, वो बादशाह जिसने अपने बच्चों के सर कटते देखकर भी अंग्रेजी की गुलामी मंज़ूर नही की औऱ ख़ुद ताउम्र हिंदुस्तान से दूर सज़ा काटी और वही दफन भी हो गए। वो चाहते तो  और राजा महाराजाओं की तरह घुटने टेक कर अब तक अपनी बेशुमार दौलत पर राज़ करते। आज उनकी भी औलादें मंत्री या सांसद होते पर मुग़लों के खून में कभी गुलामी नही थी। सर कटाना पसंद था पर झुकना नही...😢 कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें, इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में। दिन ज़िन्दगी खत्म हुए शाम हो गई, फैला के पांव सोएंगे कुंज-ए-मज़ार में। आज अंग्रेजों से माफी मांगने वाले देशभक्त हो गए और सर कटने वाले लुटेरे देशद्रोही हो गए, नफ़रत इतनी की मुग़लों के बसाये शहरों के नाम बदलने की होड़ लगी है.. Like and share with subscribe for information Visit our chanel https://youtu.be/8rrws1ebvRg

शहीद अशफाकउल्लाखां Indian Freedom fighter Shahid Ashfaque ulla Khan

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जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलाएगा ! शहीद अशफाकुल्लाह खां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी सेनानी और 'हसरत' उपनाम से उर्दू के अज़ीम शायर थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक ने अपनी किशोरावस्था में  ही अपना जीवन वतन की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। वे क्रांतिकारियों के उस जत्थे के सदस्य थे जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, मन्मथनाथ गुप्त, राजेंद्र लाहिड़ी, शचीन्द्रनाथ बख्सी, ठाकुर रोशन सिंह, केशव जी चक्रवर्ती, बनवारी लाल, मुकुंदी लाल शामिल थे।  8 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर में रामप्रसाद बिस्मिल और चन्द्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में इस क्रांतिकारी जत्थे की एक अहम बैठक हुई जिसमें अपने क्रांति अभियान हेतु हथियार खरीदने के लिए ट्रेन से सरकारी ख़ज़ाने को लूटने की योजना बनी। उनका मानना था कि यह वह धन अंग्रेजों का नहीं था, अंग्रेजों ने उसे भारतीयों से ही हड़पा था। 9 अगस्त, 1925 को अशफाकउल्ला खान और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आठ क्रांतिकारियों के दल ने सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन से अंग्रेजों का खजाना लूट लिया। अंग्र...

अलाउद्दीन खिलजी Alauddin Khilji The best ruler for economic History of India -The Cambridge Economic History of India.

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Alauddin Khilji The best ruler for economic History of India -The Cambridge Economic History of India.  दिन 21 अक्टूबर 1296 को अलाउद्दीन खिलजी ने इलाहाबाद के पास जिला कोशांबी कड़ा नाम की जगह पर सुल्तान की ताजपोशी हुई।  चाचा जलालुद्दीन ख़िलजी का क़त्ल कड़ा में ही हुआ, क़त्ल के कुछ महीनों बाद अलाउद्दीन दिल्ली का सुल्तान बना। तब ईलाहाबाद का  कोई नमो निशान नही था कौशाम्बी जौनपुर की राजधानी हुआ करती थी सुल्तान बनने से पहले अलाउद्दीन यहा का गवर्नर था और यही से पूरे अवध का संचालन करता था। सुल्तान बनते ही अलाउद्दीन ने दिल्ली का रुख किया तब दिल्ली का महरौली का इलाका दिल्ली का मुख्य शहर था। यही क़ुतुबमीनार की तामीर भी हुई। सुल्तान बनते ही अलाउद्दीन सबसे टैक्स सिस्टम को सुधारा जिससे बिचौलियों को हटाकर सीधे आम आदमी से जोड़ा बिचौलियों के हटने किसानों और गरीबो को बहोत फायदा हुआ। इस टैक्स सिस्टम को शेर शाह सूरी से लेकर मुग़लों तक ने इस्तेमाल किया। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की किताब  "The Cambridge Economic History of India" में लिखा है ख़िलजी का यह टैक्स सिस्टम हिंदुस्तान सबसे अच्...

Chatrapati Shivaji Maharaj The great Maratha King

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Chatrapati Shivaji Maharaj People likes Because:- शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्योंकि वे मुस्लिम-विरोधी थे:- शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्योंकि वे मुस्लिम-विरोधी थे या वे ब्राह्मणों या गायों की पूजा करते थे. वे जनता के प्रिय इसलिए थे क्योंकि उन्होंने किसानों पर लगान और अन्य करों का भार कम किया था. शिवाजी के प्रशासनिक तंत्र का चेहरा मानवीय था और वह धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता था. सैनिक और प्रशासनिक पदों पर भर्ती में शिवाजी धर्म को कोई महत्व नहीं देते थे. उनकी सेना के एक तिहाई सैनिक मुसलमान थे. उनकी जलसेना का प्रमुख सिद्दी संबल नाम का मुसलमान था और उसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम सिद्दी थे. दिलचस्प बात यह है कि शिवाजी की सेना से भिड़ने वाली औरंगजेब की सेना का नेतृत्व मिर्जा राजा जयसिंह के हाथ में था, जो कि राजपूत था. जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्यक्तियों ने उनकी मदद की थी, उनमें से एक मुसलमान था जिसका नाम मदारी मेहतर था.उनके गुप्तचर मामलों के सचिव मौलाना हैदर अली थे और उनके तोपखाने की कमान इब्राहिम गर्दी के ...

Muslim Ruler Changej Khan's Grandson Barek khan

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Muslim Ruler Changej Khan's Grandson Barek khan :- महान मंगोल शासक चंगेज़ खान का पोता शहज़ादा बरके ख़ान एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था। उसने देखा कि एक बुज़ुर्ग जिसकी दाढ़ी है, वह सो रहा है और बराबर में एक कुत्ता भी सो रहा है, शहज़ादे ने सवारी से उतर कर शरारत की और बुज़ुर्ग के चेहरे पर अपना पैर रख कर खड़ा हो गया। दाढ़ी देख कर हिकारत से बोला :- "बता तू अच्छा या यह कुत्ता अच्छा"? बुज़ुर्ग ने बड़े तपाक से जवाब दिया कि अगर मेरी मौत ईमान पर हुई तो मै अच्छा; वर्ना यह कुत्ता अच्छा..! यह जवाब सुनकर शहज़ादे के साथ आये खड़े हुए लोगों में सुकूत तारी हो गया, बरके ख़ान के पैर में लरज़ा तारी हो गया। उसने पैर हटा लिया और बुज़ुर्ग को बा इज़्ज़त खड़ा करके पूछा, यह ईमान क्या चीज़ है ? बुज़ुर्ग ने कहा कि यह वह दौलत है जिसे न तुम्हारा दादा लूट सका और न यह तुम्हारे हाथ आएगी, चाहे तुम सौ साल हुकूमत कर लो। शहज़ादे ने कहा लेकिन मुझे वह चाहिये। बुज़ुर्ग ने कहा कि अभी आप इस ईमान की दौलत को नही संभाल सकते। शहज़ादे ने अपने हाथ से अंगूठी निकाल कर दी और बोला कि जब मै बादशाह बनूंगा तब आप...